Monday, August 17, 2009

Arakhs The Suryavanshi

The Arakhs are a martial Suryawanshi kshatriya tribe who at one time ruled large areas of Awadh. The heroes of Arakh clan include sun-worshipper Maharaja Tilok Chand (who captured the throne of Delhi in 918 A.D. by defeating king Vikrampal), Salhia Singh (who established the town of Sandila), Malhia Singh (who eastablished the town of Malhiabad) and Maharaja Khadagsen (who established Khaga town in Fatehpur district of Uttar Pradesh).

Arakhs claim themselves to be the ancient-most kshatriya tribe of Indian origin. They claim their descent from ancient Suryawanshi kshatriya clan to which Lord Rama belonged. 'Arakh' is said to be the distorted form of 'Arka' 'अर्क' (a Sanskrit word meaning sun). 'Arkawanshi' (अर्कवंशी) is a synonym of 'Suryawanshi'. Thus a clan of Suryawanshis was also called as 'Arkawanshi'. The founder of Suryavansha Vaivasvat Manu was also known 'Arka Tanaya' (अर्क तनय) meaning 'the son of Arka'. 'Arkawanshi' became 'Arka' (अर्क) and later 'Arak' (अरक) and 'Arakh' (अरख) in locally spoken dialects. Arakhs have been the worshipper of sun god (Arka-अर्क) and Lord Shiva. Arkawanshis also have different sub-clans as Khangars, Gauds, Bachhals and Adhiraj.

3 comments:

Pradeep Singh said...
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पं0 राम कृष्ण शुक्ला said...

अर्कवंशी यह प्राचीनकाल से चली आ रही वो परम्परा है जिसकी स्थापना भगवान सूर्य(अर्क)देव के पुत्र महाराजा मनु जिन्हे वैवस्वत मनु के नाम से जाना जाता है इन्होने ही की थी इन्ही ने मनुस्मृति लिखी थी इसका उपदेश महाराजा मनु द्वारा ऋषियों को दिया गया था। जिस प्रकार से सूर्यवंश में महाराजा रघु के जन्म से वचन लेने की परम्परा चली उसी प्रकार जब सूर्यवंश में कलियुग के प्रारम्भ में यज्ञो एवं संस्कारों को पूर्ण वैदिक रूप से बनाये रखने के लिये उन्हे बचाये रखने के लिये समय के मांग की आवश्यकता हुई तब यह अर्कवंश नाम मिला इन्ही अर्कवंशी राजा महाराजाओ ने भारशिव की उपाधि भी धारण की थी भारशिव इसी वंश परम्परा से सम्बन्ध रखते है सूर्यवंश एवं नागवंश मे वैवाहिक सम्बन्ध भी पौराणिक काल से चला आ रहा है जब भगवान श्रीराम जी के पुत्र का विवाह नागवंश की राजकुमारी से हुआ था। अर्कवंश का शासन काल प्राचीन समय से लेकर सन् 1400 व 1500ई0 तक रहा अर्कवंश का शासन उ0प्र0 के विशाल क्षेत्रो पर तो था ही अपितु राजस्थान,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,गुजरात व चंडीगढ़ तक विद्यमान था इन्ही के कुल में बहुत से वीरो वीरांगनाओ ने जन्म लिया था जिनमें महाराजा तिलोकचन्द्र अर्कवंशी महारानी भीमादेवी महाराजा खड्गसेन अर्कवंशी महाराजा सल्हीय सिंह अर्कवंशी महाराजा गोविन्द चन्द्र अर्कवंशी महाराजा मल्हीय सिंह अर्कवंशी महाराजा दलपतसेन अर्कवंशी महाराजा महिपति सेन अर्कवंशी आदि जैसे नाम सम्मिलित है, अर्कवंश के इतिहास को कई इतिहासकारो एवं विद्वानों ने अपनी लेखनी में भी लिखा है वास्तविक रूप से यही मूल सूर्यवंशी है इतिहासकारो ने इनका सम्बन्ध भी महाराजा इक्ष्वाकु से सम्बन्ध करके लिखा है जो बिल्कुल सत्यार्थ सिद्ध होता है इनका गोत्र इनके कुल देवता कुल देवी शासन क्षेत्र वंश प्रतीक परम्परा प्रतीक सब पुराणो में वार्णित की तरह है जो यह सिद्ध भी करता है अतः अर्कवंशी ही सूर्यवंशी है और सूर्यवंशी ही अर्कवंशी है जिस तरह से रघुवंशी ही सूर्यवंशी है और सूर्यवंशी ही रघुवंशी अतः रघुवंशी ही अर्कवंशी है और अर्कवंशी ही रघुवंशी है।

पं0 राम कृष्ण शुक्ला said...
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